जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Wednesday, June 3, 2015
स्त्री
प्रेमिका के भीतर की
एक फांस है...
स्त्री
-आरती
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