जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Friday, October 11, 2013
तुमने अपनी जेब से सबसे चमकीला सिक्का निकालकर
मेरी हथेली रखा था,
उस दिन से चाँद फलक पर नहीं...
मेरी हथेली पर खिलता है।
-[आरती]
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