शब्दों की कतरनें
एहसासों की डायरी
काग़ज़ पर उड़ेलकर जज़्बातों की स्याही..
दर्ज करते हैं पन्ने दर पन्ने
उन लम्हातों की शायरी..
जो तुमने कही और मैंने सुनी..
तिनका-तिनका चुन कर तुम्हारे लबों से
समेटे हैं मैंने यह तमाम हर्फ़..
जब कभी लौट पाओ तो देखना
कि तुम.. गए ही कब थे..
मैं- तुम्हारी शायरा..
~~(आरती)~~
एहसासों की डायरी
काग़ज़ पर उड़ेलकर जज़्बातों की स्याही..
दर्ज करते हैं पन्ने दर पन्ने
उन लम्हातों की शायरी..
जो तुमने कही और मैंने सुनी..
तिनका-तिनका चुन कर तुम्हारे लबों से
समेटे हैं मैंने यह तमाम हर्फ़..
जब कभी लौट पाओ तो देखना
कि तुम.. गए ही कब थे..
मैं- तुम्हारी शायरा..
~~(आरती)~~
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