जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Wednesday, March 23, 2016
पाबंद
तुमने रंग देखे, उसमें पाबंद उदासी नहीं
तुमने वही देखा
जो तुम देखना चाहते थे
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आरती
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