जब बहुत देर तक वो
आवाज़ नहीं देता...
आवाज़ नहीं देता...
उसके माथे पर टंकी लहर पर ठिठकी
उम्मीद की रोशनाई
धीमी पड़ने लगती है
उम्मीद की रोशनाई
धीमी पड़ने लगती है
ढ़ाई आखर के खाखे में
घुटने लगती हैं
प्रेम की साँसें
घुटने लगती हैं
प्रेम की साँसें
इंतज़ार के पाँव में
बेतरह चुभने लगती है
समय की कीलें
बेतरह चुभने लगती है
समय की कीलें
आसमान के कैनवास पर
खाली रहती है चाँद की जगह
और तारे डूब जाना चाहतें हैं
खाली रहती है चाँद की जगह
और तारे डूब जाना चाहतें हैं
मैं पानी पर लिखती हूँ…प्रेम
जो आँख की कोर से ढलक कर
ठहर जाता है मेरे
दायें गाल के तिल पर…………
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आरती
जो आँख की कोर से ढलक कर
ठहर जाता है मेरे
दायें गाल के तिल पर…………
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आरती
हर शब्द अपनी दास्ताँ बयां कर रहा है आगे कुछ कहने की गुंजाईश ही कहाँ है बधाई स्वीकारें
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