जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Monday, December 22, 2014
अलाव
सोचती हूँ
कभी कह पाऊँगी तुमसे
जो अब तक हऴक मेँ अलाव लिए बैठी हूँ..
-आरती
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