Friday, August 30, 2013

हिंदी दैनिक 'कल्पतरु एक्सप्रेस' में प्रकाशित मेरी चार कविताएँ


'नेशनल दुनिया' अखबार में प्रकाशित मेरी एक कविता

सोमवार यानि 19.08.2013 को 'नेशनल दुनिया' अख़बार में प्रकाशित मेरी कविता।'नेशनल दुनिया' अखबार में प्रकाशित मेरी एक कविता

कान्हा : मेरा एक स्केच

                                                              कान्हा : मेरा एक स्केच



Thursday, May 30, 2013

वक्‌त के पायदान से लुढ़का हूँ मैँ,
फिर अतीत की गोद मेँ झूल जाना है मुझे..

-आरती

माँ...



रुई के फाहोँ सी कोमल हथेलियाँ तुम्हारी
मेरे गालोँ को थपथपातीँ कभी माथे पर दुलारतीँ..

माँ कहाँ से पाई तुमने इतनी कोमलता..

स्नेह की आँच पर सेकती तुम गोभी के पराँठे
तुम्हारी उँगलियोँ के स्पर्श से हो जाते जो कुछ ज़्यादा नर्म..
जीवन की दौड़ मेँ जब कभी गिर जाए..हौँसला मेरा
बस! एक थपकी बहुत है तुम्हारी..मेरे फिर खड़े होने को..

तुम्हारी नज़र मेँ मैँ सबसे सुँदर,मैँ सबसे काबिल..
इसी विशवास पर कर लेती मैँ सब कुछ हासिल..

-आरती
जहाँ सोच का दायरा  ख़त्म होता है,
दिल की दहलीज़ वहीँ से शुरू होती है।

-आरती