जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Tuesday, September 23, 2014
अस्तित्व
समंदर सुनो !
जिस तरह मैं तुम्हारे अस्तित्व का हिस्सा हूँ
उसी तरह तुम भी मेरे वजूद में शामिल हो।
तुम्हारी नदी.…
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(आरती)
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