जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....

मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।

Monday, January 7, 2013

NA JAANE KYUN AANKHEIN NUM HAIN AAJ (Meri ek rachna)

NA JAANE KYUN AANKHEIN NUM HAIN AAJ
Posted by Arti Varma at 1:17 AM No comments:
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