जज़्बातों का दरिया, लफ़्ज़ों के लिबास.....
मैं बस अहसास लिखती हूँ। शब्द महज़ लिबास भर हैँ।
Tuesday, October 23, 2012
Nishabd
मैं चुप थी,
तुम भी वहां मौन थे..
शायद अब शब्दों की ज़रूरत ख़त्म हो चुकी थी..
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